Sunday, June 29, 2008

१९७८ की डायरी के कुछ पन्ने !

भिन्न भिन्न शायरों के लिखे हुए ये शेर मुझे बहुत पसंद थे, स्टुडेंट लाइफ में लिखे इन शेरों पर इनके लेखक का नाम नहीं है ! क्षमा मांगते हुए उनके शेरों को यहाँ दे रहा हूँ !

"हमने जब मौसमे -बरसात से चाही तौबा
बादल इस जोर से बरसा कि इलाही तौबा !''

"है मुमकिन दुश्मनों की दुश्मनी पर सबर कर लेना
मगर यह दोस्तों की बेरुखी देखी नही जाती !"

"भुलाई नहीं जा सकेगीं ये बातें ,
बहुत याद आयेंगे हम याद रखना "

" अभी से क्यों छलक आए तुम्हारी आँख में आंसू
अभी छेडी कहाँ है दास्ताने जिंदगी हमने "

" दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
दोस्तों को आजमाते जाइए "

" हमें कुछ काम अपने दोस्तों से आ पड़ा यानी
हमारे दोस्तों के बेवफा होने का वक्त आया "

" तेरी इस बेवफाई पर फ़िदा होती है जां मेरी
खुदा जाने अगर तुझमे वफ़ा होती तो क्या होता"

2 comments:

रंजू ranju said...

अच्छे लगे सभी ..

Udan Tashtari said...

सभी बेहतरीन. अच्छा कलेक्शन है.