Friday, July 18, 2008

गुमनाम शायरों से !

दिल गम से जल रहा है जले , पर धुआं न हो
मुश्किल है इसके बाद कोई ,इम्तिहाँन हो !
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हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले ,
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
*************************************** " ग़ालिब"
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
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आप खून ऐ इश्क का इल्जाम अपने सर न लें ,
आपका दामन सलामत, अपने कातिल हम सही

4 comments:

राज भाटिय़ा said...

दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
अजी हम टुटने दे तब ना, शेर बहुत खुब हे, धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बहुत अच्छा कलेक्शन लाये हैं, आभार.

सतीश सक्सेना said...

शुक्रिया राज और समीर लाल जी!
आप लोग वाकई दिल जोड़ने का काम कर रहे हैं !
सतीश

अनुराग said...

bahut khoob....