Sunday, July 20, 2008

शकील बदायूँनी !

"ताबंदा रहे ईमान शकील इसको ही इबादत कहते हैं ,
सजदे के लिए कोई कैद नही, काबे में हो या बुतखाने में "

3 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत खूब शेर लाये हैं शकील बदायूँनी साहेब का, आभार.

श्रद्धा जैन said...

bhaut sunder sher

advocate rashmi saurana said...

sundar sher.aabhar padhane ke liye.