Sunday, August 17, 2008

अमरज्योति की एक कविता लेखकों के प्रति !

अमर की लिखी निम्न कविता " राजा लिख " मेरी सर्वाधिक पसंद की गयी कविताओं में से एक है ! यह कविता आधुनिक गीतकार, कवियों तथा लेखक मठाधीशों पर एक तीखा व्यंग्य है ! हम आजकल क्या लिखें ...क्या लिख रहे हैं ॥जो कुछ भी लिखते हैं अपना फायदा देख कर लिखते हैं ! लेख़क समाज पर किए गए तीखे व्यंग्य के लिए आभार सहित यह कविता यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ !

राजा लिख और रानी लिख।
फिर से वही कहानी लिख॥
बैठ किनांरे लहरें गिन।
दरिया को तूफ़ानी लिख॥

गोलीबारी में रस घोल।
रिमझिम बरसा पानी लिख॥
राम-राज के गीत सुना।
हिटलर की क़ुरबानी लिख॥

राजा को नंगा मत बोल।
परजा ही बौरानी लिख॥
फ़िरदौसी के रस्ते चल।
मत कबीर की बानी लिख॥

random rumblings से साभार !

10 comments:

राजीव रंजन प्रसाद said...

सतीश जी,


संग्रहणीय रचना है यह। सचमुच एक आईना सी है यह रचना...


***राजीव रंजन प्रसाद

www.rajeevnhpc.blogspot.com
www.kuhukakona.blogspot.com

मीत said...

सही कहा राजीव जी ने. "संग्रहणीय रचना है यह।" .... कभी पढ़ी थी, आज फिर से पढ़वाने का बहुत बहुत शुक्रिया.

Nitish Raj said...

राजीव ने सही कहा। बहुत ही बढ़िया, उम्दा।

योगेन्द्र मौदगिल said...

अच्छी रचना
इस प्रस्तुति के लिये आप साधुवाद के पात्र हैं

राज भाटिय़ा said...

राजा को नंगा मत बोल।
परजा ही बौरानी लिख॥
फ़िरदौसी के रस्ते चल।
मत कबीर की बानी लिख॥
सुन्दर रचना के लिये धन्यवाद

Ila's world, in and out said...

राजा को नंगा मत बोल।
परजा ही बौरानी लिख॥

क्या बात है सतीशजी?पहली बार आपके चिट्ठे पर आयी हूं,लगा पहले क्यूं नही आयी?

ज़ाकिर हुसैन said...

राजा को नंगा मत बोल।
परजा ही बौरानी लिख॥
फ़िरदौसी के रस्ते चल।
मत कबीर की बानी लिख॥
बहुत शानदार और संग्रहनीय रचना देने के लिए आपका आभार

महामंत्री-तस्लीम said...

राजा लिख और रानी लिख।
फिर से वही कहानी लिख॥
बैठ किनांरे लहरें गिन।
दरिया को तूफ़ानी लिख॥

बहुत सुन्दर कविता। आपने लेखकों और कवियों पर अच्छा व्यंग्य लिखा है, पर देखिए यह कितनों पर असर करता है।

सतीश सक्सेना said...

आप सबका यहाँ आकर कविता की तारीफ करने के लिए, मैं अपनी व अमर जी की तरफ़ से शुक्रिया अदा करता हूँ !

amar said...

मेरा मानना है कि कोई भी रचना स्वान्तः सुखाय नहीं होती। रचनाकार लिखता ही इस लिये है कि वह अपने विचार और भावनायें अपने आस-पास के लोगों
को मौखिक वार्तालाप से बताने के अतिरिक्त भी व्यापक स्तर पर सँप्रेषित करना चाहता है। इतने सारे सुधी पाठकों की प्रतिक्रियाओं से अभिभूत हूं। आप सभी का हार्दिक आभार। और सतीश जी से तो बस यही कहना है-'बलिहारी गुरु आपकी…'