Thursday, September 25, 2008

शब्द चितेरे राकेश खंडेलवाल का "कुछ ग़ज़ल कुछ गीत" पर स्वागत हैं !


ब्लॉग जगत में फैले वैमनस्य और नफरत के जहर से दुखी होकर जब मैंने " वे नफरत बाँटें इस जग में हम प्यार लुटाने बैठे हैं ! !" पोस्ट लिखी समय मेरी इस रचना और संवेदना को ब्लॉग जगत के तमाम सम्मानित लेखकों ने आकर जो सम्मान दिया उससे मैं बेहद अभिभूत हुआ, राकेश खंडेलवाल ने जिस अपनत्व से अपनी प्रतिक्रिया और हौसला दिया वह एक नया उदाहरण होना चाहिए ब्लाग जगत के लिए ! मैं यह देख कर भौचक्का रह गया कि उनकी प्रतिक्रिया के बिना यह ख़त अधूरा था जिसे राकेश जी ने आकर पूरा किया !

...वे शंकित, कुंठित मन लेकर,
कुछ पत्थर हम पर फ़ेंक गए
हम समझ नही पाए, हमको
क्यों मारा ? इस बेदर्दी से ,
हम चोटें लेकर भी दिल पर, अरमान लगाये बैठे हैं !

......क्या शिकवा है क्या हुआ तुम्हे
क्यों आँख पे पट्टी बाँध रखी,
क्यों नफरत लेकर, तुम दिल में
रिश्ते, परिभाषित करती हो,
हम पुरूष ह्रदय, सम्मान सहित, कुछ याद दिलाने बैठे हैं....

राकेश जी ने इस ख़त को कुछ इस तरह पूरा किया ...

"जब भी कुछ फ़ूटा अधरों से
तब तब ही उंगली उठी यहाँ
जो भाव शब्द के परे रहे, वे
कभी किसी को दिखे कहाँ
यह वाद नहीं प्रतिवाद नहीं
मन की उठती धारायें हैं,
ले जाये नाव दूसरे तट, हम पाल चढ़ाये बैठे हैं !"

अद्वितीय शब्द संयोजन के धनी इस विनम्र महारथी ने " कुछ ग़ज़ल कुछ गीत " पर सह लेखक बन कर जो सम्मान दिया है हम डॉ अमर ज्योति और सतीश सक्सेना उनके आभारी हैं !

5 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

"जब भी कुछ फ़ूटा अधरों से
तब तब ही उंगली उठी यहाँ
जो भाव शब्द के परे रहे, वे
कभी किसी को दिखे कहाँ
यह वाद नहीं प्रतिवाद नहीं
मन की उठती धारायें हैं,
ले जाये नाव दूसरे तट, हम पाल चढ़ाये बैठे हैं !"

बहुत ख़ूब...

seema gupta said...

जब भी कुछ फ़ूटा अधरों से
तब तब ही उंगली उठी यहाँ
जो भाव शब्द के परे रहे, वे
कभी किसी को दिखे कहाँ
यह वाद नहीं प्रतिवाद नहीं
मन की उठती धारायें हैं,
ले जाये नाव दूसरे तट, हम पाल चढ़ाये बैठे हैं !"

" Ya, Rakesh jee surely deserve appreciation for this great contribution. and the way you have shown your respect and regards toward him, it is also commendable"

Regards

सतीश सक्सेना said...

शुक्रिया सुश्री फिरदौस और सीमा जी,
राकेश जी ! इस समय के बेहतरीन शब्द सामर्थ्य रखने वाले गीतकारों में से एक हैं,
in my opinion he is living legend among all the poets. so we should pay respect to his work as much as we can .

Shastri said...

स्वागत है, स्वागत है राकेश खंडेलवाल जी. आपकी रचना का एक अंश देखते ही मुझे यकीन हो गया कि इस चिट्ठे पर आपकी उपस्थिति से सब को बहुत कुछ मिलेगा!!

-- शास्त्री

-- हिन्दीजगत में एक वैचारिक क्राति की जरूरत है. महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

श्री राकेश जी हिन्दी कविता के रससिध्ध कवि हैँ ~~
उनकी कविताएँ सदा भाती हैँ
- लावण्या