Saturday, September 27, 2008

डॉ अमर ज्योति का इस ब्लाग पर सह लेखक रूप में स्वागत है !

नाम:-अमर ज्योति "नदीम" M।A।(Eng।),M.A.(Hindi),Ph.D(English)(आगरा विश्वविद्यालय) व्यवसाय:- विभिन्न स्तरों पर अध्यापन के उपरांत ग्रामीण बैंकमें अधिकारी। फ़िलहाल एक बड़ी सड़क दुर्घटना के बाद लंबे समय से बिस्तर पर।रचनायें:- अधिकतर ग़ज़लें, कुछ गीत, कुछ अतुकांत कवितायें, कुछ लेख, फ़िट्ज़्जेरल्ड की रुबाइयात उमर ख़ैय्याम की कई रुबाइयों का हिंदी अनुवाद, एक खण्डकाव्य…।

आधुनिक लेखकों पर व्यंग्य करतीं ये लाइनें, राजा लिख याद दिलातीं हैं, डॉ अमर ज्योति की ! इन पंक्तियों को पढ़कर एक शब्दचित्र खिंच जाता है जिसमें एक लेखक को, लिखने का प्रयत्न करते देख, अमर कह रहें हैं.... तेरे पास लिखने के लिए और क्या है ? वही पुरानी राजा रानी की कहानी लिख ..ठहरे हुए पानी को तूफानी लिख, और जब देश में खून बहाया जा रहा हो तो उसमें भी रस घोल के कविता लिख ...

उनकी अधिकतर कवितायें कमजोरों और जीवन को ढोते हुए लोगों का प्रतिनिधित्व करती है ! उनकी हर ग़ज़ल, दर्द में तडपती हुई जिंदगियों की, हकीक़त दिखाती नज़र आती है !

उसने कभी भी पीर पराई नहीं सुनी कितना भला किया कि बुराई नहीं सुनी ...

सुबह-सवेरे एक गाँव की गरीब विधवा रज्जो की अम्मा की चिंता का जीवंत मार्मिक उदाहरण है... जिसे बार बार पढने का मन करता है ...

राम के मंदिर पर लिखते हुए अमर को अपने देश में कप प्लेट धोते लव कुश याद आ रहे हैं ! इनका पूछना है कि "रख सकेंगे क्या अंगूठे को बचा कर एकलव्य;रामजी के राज में शंबूक जी पायेंगे क्या!"

एक और बानगी देखिये- कि कुछ लोगों को शायर और कवियों के लिए पसंदीदा मौसम सावन और बदली छाये माहौल से दहशत होती है, बदली के छाने से .....यह भी जीवन है ! कितने लोग इनके बारे में सोचते हैं ?

डॉ अमर ज्योति random rumblings की रचना को एक बार पढ़ कर मन नही भरता ! हर रचना एक वास्तविक चित्रण करती है एक सच्चाई का जिसको हम आम जीवन में नज़रन्दाज़ करते हैं ! विनम्रता की हालत यह है, अपने परिचय में एक पूरी लाइन भी नही लिखी ! जनाब इंग्लिश साहित्य में Ph.D. हैं, और सेवा हिन्दी की कर रहे हैं ! डॉ अमर ज्योति जैसे स्वच्छ लेखक हिन्दी जगत की आंख में गुलाब जल के समान हैं जो बेहद शीतलता देते हैं !

4 comments:

दीपक said...

ऐसे संवेदनशील मन का हार्दिक स्वागत!!

Dr. Amar Jyoti said...

अवाक् रह गया हूं अपने बारे में आपका आलेख देख कर। एक नितांत साधारण व्यक्ति को आपने पता नहीं क्या बना दिया है। सूक्ष्मदर्शी के नीचे एक क्षुद्र कीट भी विराट दिखता है। आपका स्नेह और आपका
भावुक ह्रदय ऐसे ही सूक्ष्मदर्शी हैं;और क्या कहूं।

sethu said...

Bringing Dr. amar jyoti's Biography into lime light is a Great work.His contribution Ram Ke Mandir is too good to be commented on.

Shastri said...

डॉ अमर, हम तो पहले से ही आपकी लेखनी के कायल हैं अत: एक बार और आपका स्वागत है!!!

-- शास्त्री

-- हिन्दीजगत में एक वैचारिक क्राति की जरूरत है. महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)