Tuesday, October 28, 2008

दीप पर्व

दीप का यह पर्व मन के द्वार पर आ रोशनी पल पल जगाये
और पथ में कोई भी अवरोध आने से प्रथम अवसान पाये
स्वप्न जो संवरा नयन में, शिल्प में ढल सामने आ मुस्कुराये
जो ह्रदय से उठ रही हैं कीजिये स्वीकार मंगल कामनायें

सादर,

राकेश खंडेलवाल

6 comments:

Rachna Singh said...

aap ko bhi deepawali ki shubhkamnaa , aaney vaala varsh bhula dae har peeda ko jis sae man aap ka vyathit rahaa ho , ishwar sae bas itni hi parthnaa

राज भाटिय़ा said...

दीपावली पर आप को और आप के परिवार के लिए
हार्दिक शुभकामनाएँ!
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

दीपावली के इस शुभ अवसर पर आप और आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

सतीश सक्सेना said...

बहुत प्यारा संदेश है राकेश भाई ! इस अवसर पर आपको भी सपरिवार शुभकामनायें !

Dr. Amar Jyoti said...

ड्गेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं।

Dr. Amar Jyoti said...

क्षमा चाहता हूं टाइपो की भूल के लिये ।मेरा मतलब था ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं।