Friday, November 14, 2008

कहां गए

कहां गए वो लड़कपन के ख़्वाब, मत पूछो;
कड़ा सवाल है, इसका जवाब मत पूछो।

अकेले मेरे दुखों की कहानियां छोड़ो;
समंदरों में लहर का हिसाब मत पूछो।

मुबारकों की रवायत है कामयाबी पर,
कि कौन कैसे हुआ कामयाब, मत पूछो।

जो हर कदम पे मेरे साथ है, वो तनहाई
मेरा नसीब है या इंतख़ाब, मत पूछो।

अमावसों में चराग़ों का इंतज़ाम करो;
कहां फ़रार हुआ आफ़ताब मत पूछो।

9 comments:

"अर्श" said...

जो हर कदम पे मेरे साथ है, वो तनहाई
मेरा नसीब है या इंतख़ाब, मत पूछो।

bahot khub umda shayari,umda lekhan ..aapko dhero badhai..

singhsdm said...

मुबारकों की रवायत है कामयाबी पर,
कि कौन कैसे हुआ कामयाब, मत पूछो।
Its true my dear....UGATE SOORAJ KO HI SAB SALAAM KARTE HAIN. rich ghazal, I visited ur blog first time but I'll come regularly.

Shar said...

"समंदरों में लहर का हिसाब मत पूछो।"
=====
"अमावसों में चराग़ों का इंतज़ाम करो
कहां फ़रार हुआ आफ़ताब मत पूछो। "
====
बहुत खूब !

एक बात अमर जी,
आज पूनम है :)

सादर ।।

Jimmy said...

Good post Ji


Shyari is here plz visit karna ji

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Jimmy said...

nice post ji


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राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुन्दर गजल लिखी है आप ने .... चलिये हम सिर्फ़ धन्यवाद कहते है कोई हिसाब नही पुछते

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब !

Dr. Amar Jyoti said...

आप सभी का हार्दिक आभार।

अनुपम अग्रवाल said...

जो हर कदम पे मेरे साथ है, वो तनहाई
मेरा नसीब है या इंतख़ाब, मत पूछो।

अमावसों में चराग़ों का इंतज़ाम करो;
कहां फ़रार हुआ आफ़ताब मत पूछो।

ग़ज़ल का सवाल लाजवाब ,मत पूछो