Tuesday, January 6, 2009

प्रिन्टर ने इन्कार कर दिया

कवि सम्मेलन की खातिर , ये सोचा कविता चार छाप लूँ
लेकिन प्रिन्टर ने कवितायें देने से इन्कार कर दिया

तकनीकी के साथ चले हम, इसीलिये की विदा डायरी
कम्पूटर पर संजो रखी है, हमने अपनी सकल शायरी
जहां कहीं भी जाते अपनी पेन-ड्राइव को ले जाते हैं
वहीं छाप कत अपनी कविता, सम्मेलन में जा गाते हैं

हम निर्भर हैं इन यंत्रों पर, ये हमने इज़हार कर दिया
इसीलिये प्रिन्टर ने कविता देने से इन्कार कर दिया

बोला, मेरी है कविता में जो तुम कहते एक कहानी
नहीं चाहता मैं दोबारा फिर से जाये कहीं बखानी
बहुत रो चुका काले आंसू, अब तक तुमसे इंगित लेकर
लेकिन आज कोष रीता है, कुछ न मिला वापिस, दे दे कर

जितने भी ट्रे में थे कागज़ एक एक को फाड़ रख दिया
और एक भी कविता मुझको देने से इन्कार कर दिया

बूट किया मैने तो उसने पॄष्ठ चार छह वापिस उगले
लेकिन उनमें अंकित थे कुछ धब्बे कुछ स्याही के गुठले
आटो और मैनुअल फ़ीडें, सब तकनीकें अजमा हारे
इसीलिये अब कविता के बिन आये हैं हम यहां बिचारे

जो प्लान था आज सुनाने का, वो बंटाढार कर दिया
क्योंकि मुझे प्रिन्टर ने कविता देने से इन्कार कर दिया

8 comments:

Shar said...

:) :) :) Ha ha

Amit said...

बहुत अच्छी कविता है..अच्छा लगा पढ़ कर.........

Dr. Amar Jyoti said...

रहिमन देखि बड़ेन को लघु न दीजिये डार
जहां काम आवे कलम, कहा करे 'प्रिंटार'।
:-)

seema gupta said...

जो प्लान था आज सुनाने का, वो बंटाढार कर दिया
क्योंकि मुझे प्रिन्टर ने कविता देने से इन्कार कर दिया
" हा हा हा हा प्रिन्टर भी भावः खाने लगा...."

regards

राज भाटिय़ा said...

अजी आप ने ऎसे बिगडेल ओर गन्दे प्रिंटर को अपनी रचना दी ही क्यो, देने से पहले दो चार कापिया कर लेते...:)

बहुत सुंदर भाव लिये है आप की कविता.
धन्यवाद

विवेक said...

बहुत दिलचस्प !!!!

Nirmla Kapila said...

aji vo tail vaalon ke saath hadtaal par gaya hoga use nikaal naya le lijiye

सतीश सक्सेना said...

बड़ा मस्त मूड है इस गीत का भाई जी ! मज़ा आगया आशा है इस मूड में भी लिखते रहोगे !शुभकामनायें !