Friday, January 30, 2009

दुम हिलाना

दुम हिलाना
कोई मुहावरा नहीं है।
न ही मजबूरी;
कृतज्ञता?
हरगिज़ नहीं!
वह है -

एक मानसिकता
जो कुत्ते के दांतों पर हावी है।

12 comments:

परमजीत सिहँ बाली said...

हम तो यह मानते हैं कि वह प्रेम के कारण दुम हिलाता है।सही क्या है भगवान जानें।

महेंद्र मिश्र.... said...

दुम हिलाना
कोई मुहावरा नहीं है।
न ही मजबूरी;
कृतज्ञता?

बहुत ही सटीक रचना कम शब्दों में . धन्यवाद.

sangita puri said...

कम शब्‍दों में बडी बात लिखी है...

राज भाटिय़ा said...

दुम हिलाना ......
अजी आज कल तो लोग दुम वाले को भी मात कर रहे है, मुंडी हिला हिला कर.
बहुत सुंदर कविता कही आप ने.
धन्यवाद

नीरज गोस्वामी said...

क्या बात है अमर जी भाई वाह....बहुत खूब कहा...
नीरज

Anonymous said...

जो कहना है तुम आज कह लो
यूँ हमें इल्जाम ना दो
दुम हिलाते रोटियों को
रखते मन में प्यार भी तो

पर कह रहे तुमसे सनम
जो हिलाते 'लोगां' हैं दुम
उससे नहीं बेहतर हैं क्या हम
वफादार तो हैं कम से कम !

--एक भौं-भौं :)

--आप पहचानिये और ई-मेल भेजिये :)

Dr. Amar Jyoti said...

आप सभी का हार्दिक आभार। भाई'अनाम'! मैं नहीं पहचान पाया। कृपया सामने आयें।

Satish Saxena said...

बहुत खूब लिखा है भाई जी !

Anonymous said...

'BHAI' NAHIN KAH SAKTE KISI BHI HAAL MAIN :)
AB PAHCHAANIYE :)!!
KAUN HAI JO EK CHOTE SE KUTTE KI VYATHA SAMJHEGA AAPKE IS BLOGGING WORLD MEIN ??
MUJHE LAGA THA "LOGAAN" SE PAHCHAAN LENGE DR.AMAR JYOTI :)

AB GHAR JANE KA TIME HO GAYA :)

हरकीरत ' हीर' said...

Dr Amar ji kya mazra hai ye....?

Kutta, Prem, dum kuch samajh nahi aaya...?

Science Bloggers Association said...

बहुत सुन्दर, छोटी किन्तु धारदार कविता पढवाने के लिए आभार।

कडुवासच said...

... छा गये!