Wednesday, December 29, 2010

"बस इतना अधिकार मुझे दो"

"बस इतना अधिकार मुझे दो"
तुमसे माँगू ? कैसे माँगू
याचक कब अधिकारी होता
माँग सके जो अपना इच्छित
मीत ! प्रीत सम्पूर्ण समर्पण
की ही  परिभाषा होती है
अगर अपेक्षायें जुड़ जाये
प्रीत अर्थ अपना खोती है
और प्रीत में खोना पाना
देना लेना अर्थहीन सब
प्राप्ति और उपलब्धि प्रीत से
प्रियतम बँधी कहाँ बोलो कब ?


इच्छित ही जब शेष न रहता
खर्च करूँ क्यों शब्दों को फिर
अधिकारों की माँग करे जो
होता अधिकारों से वंचित

युग ने कितनी बार कहा है
माँगे भीख नहीं मिलती है
झोली फ़ैली हुई सदा ही
भरने में अक्षम रहती है
जहाँ पात्रता है सीपी सी
मोती वहीं सुलभ होते हैं
मरुथल के हिरना बून्दों की
तृष्णा लिये हुए सोते हैं

"बस इतना अधिकार मुझे दो"
नही नहीं ये कह न सकूंगा
है संतुष्टि उसी से मेरी
जो आंजुरि में होता संचित.

7 comments:

माधव( Madhav) said...

nice

Sunil Kumar said...

है संतुष्टि उसी से मेरी
जो आंजुरि में होता संचित.
बहुत अच्छी सोच ,नव वर्ष की शुभकामनाये ,नया साल आपको खुशियाँ प्रदान करे

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

Hamesha ki tarah hi prabhavi prastuti,sader shubhkamnayen Holi ki advance mey.Aapka hi
bhoopendra

एहसास said...

"युग ने कितनी बार कहा है
माँगे भीख नहीं मिलती है
झोली फ़ैली हुई सदा ही
भरने में अक्षम रहती है
जहाँ पात्रता है सीपी सी
मोती वहीं सुलभ होते हैं
मरुथल के हिरना बून्दों की
तृष्णा लिये हुए सोते हैं"

adbhut bhav prastuti.......itni saralta se.....kamaal....padh kar bahut achha laga....

Ehsaas..

tbsingh said...

bahut sunder

Manu Tyagi said...

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

welcome to Hindi blog reader

Shalini Kaushik said...

nice poem and nice blog .